SEBI MF सर्कुलर
म्यूचुअल फंड की यूनिट में ट्रांज़ैक्शन के लिए पूल अकाउंट के उपयोग को बंद करना
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स्टॉक ब्रोकर/क्लियरिंग सदस्यों द्वारा किसी भी रूप या तरीके से फंड और/या यूनिट का पूलिंग म्यूचुअल फंड ट्रांज़ैक्शन के लिए बंद कर दिया जाएगा.
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फंड पे-इन सीधे क्लियरिंग कॉर्पोरेशन द्वारा इन्वेस्टर के खाते से प्राप्त किया जाता है और फंड का भुगतान सीधे इन्वेस्टर के खाते में किया जाता है. फंड का पे-इन/पे-आउट स्टॉक ब्रोकर/क्लियरिंग सदस्यों द्वारा नहीं किया जाएगा. इसी तरह, डीमैट और नॉन-डीमैट दोनों तरह के ट्रांज़ैक्शन के लिए, यूनिट को स्टॉक ब्रोकर/क्लियरिंग सदस्यों के पूल अकाउंट के माध्यम से रूट किए बिना सीधे निवेशकों के डीमैट अकाउंट/फोलियो अकाउंट में क्रेडिट और डेबिट किया जाएगा.
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यह भी स्पष्ट किया जाता है कि म्यूचुअल फंड ट्रांज़ैक्शन की सुविधा प्रदान करने वाले स्टॉक ब्रोकर/क्लियरिंग सदस्य:
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अपने नाम पर SIP या लंपसम ट्रांज़ैक्शन के लिए मैंडेट स्वीकार नहीं करना;
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केवल संबंधित SEBI मान्यता प्राप्त क्लियरिंग कॉर्पोरेशन या म्यूचुअल फंड स्कीम के पक्ष में जारी किए गए निवेशकों से चेक भुगतान स्वीकार करें;
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अपने प्रोप्राइटरी अकाउंट या पूल अकाउंट में निवेशकों के फंड या यूनिट को किसी भी रूप या तरीके से स्वीकार या संभालना नहीं; और
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म्यूचुअल फंड ट्रांज़ैक्शन के लिए वन-टाइम मैंडेट या उनके नाम पर मैंडेट/इंस्ट्रूमेंट जारी करने के माध्यम से भुगतान स्वीकार नहीं करना. हालांकि, SEBI द्वारा मान्यता प्राप्त क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के पक्ष में वन-टाइम मैंडेट स्वीकार किए जा सकते हैं.
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स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी को निर्देश दिया जाता है कि वे इस सर्कुलर के प्रावधानों को अपने सदस्यों/प्रतिभागियों के ध्यान में रखें और इसे उनकी वेबसाइट पर भी प्रसारित करें.
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इस सर्कुलर के प्रावधान 01 जुलाई, 2022 से लागू होंगे.
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यह परिपत्र भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 की धारा 11 (1) के तहत प्रदान की गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया जाता है, जिसे SEBI (म्यूचुअल फंड) विनियम, 1996 के विनियम 77 के प्रावधानों के साथ पढ़ा जाता है, ताकि सिक्योरिटीज़ में निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके और सिक्योरिटीज़ मार्केट के विकास को बढ़ावा दिया जा सके.
